हिंदी गजल
ख्वाब रोशन है उस की झिलमिल से
कैसे कह दे मगर ये संगदिल से
बात होती है बस यहा लब से
कोई कहता नही है कुछ दिल से
ऐसी राहत न अबतलक थी कभी
जैसी पायी है आज कातिल से
रब को ढूंढू तो मै कहा ढूंढू
आदमी ही मिला है मुश्किल से
प्यार है चाह,थोडी नफरत भी
ये है रिश्ता हमारा मंझिल से
वो निशां ना मिटाये तेरा कभी
और उम्मीद कुछ न साहिल से
दिल तो बहला,मगर दिमाग कहे
उठ ही जाना है तुझ को मेहफिल से
प्रमोद बेजकर

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